दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी समझौते से भारत ने क्यों किया किनारा, ये रहा इसका जवाब  Zee News HindiGoogle समाचार पर पूरी खबर देखें
RCEP यानि Regional Comprehensive Economic Partnership आजकल आप इसका नाम सुन रहे होंगे, और ये भी कि भारत ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है. चीन सहित एशिया-प्रशांत के 15 देशों ने दुनिया के इस सबसे बड़े इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.RCEP यानि Regional Comprehensive Economic Partnership आजकल आप इसका नाम सुन रहे होंगे, और ये भी कि भारत ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है. चीन सहित एशिया-प्रशांत के 15 देशों ने दुनिया के इस सबसे बड़े इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

Does India avoid RCEP deal because of china, here is the answer | दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी समझौते से भारत ने क्यों किया किनारा, ये रहा इसका जवाब | Hindi News, बिजनेस

चीन सहित एशिया-प्रशांत के 15 देशों ने दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन देशों के बीच क्षेत्रीय वृहद आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) करार हुआ है। इस समझौते में भारत शामिल नहीं है।चीन सहित एशिया-प्रशांत के 15 देशों ने दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन देशों के बीच क्षेत्रीय

Know What Is Rcep And Why India Opted To Be Out Of World Largest Trade Agreement While 15 Countries Including Asean And China Signed - जानिए क्या है Rcep और क्यों दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौते में भारत नहीं हुआ शामिल - Amar Ujala Hindi News Live

आरसीईपी के तहत दुनिया की कुल जीडीपी का 30 प्रतिशत हिस्सा आता है, लेकिन इसमें चीन का एकाधिकार है,भारत के शामिल होने पर नारियल, काली मिर्च, रबर, गेहूं और तिलहन के दाम गिर जाने का खतरा था। छोटे व्यापारियों का धंधा चौपट होने का खतरा था,इन 16 देशों के साथ होने वाले व्यापार में भारत 11 देशों के साथ व्यापार घाटे की स्थिति में है। भारत इन देशों से जितना सामान खरीदता है उससे कहीं कम उन्हें बेचता है,भारत और बांग्लादेश के बीच मुक्त व्यापार का समझौता है। इससे बांग्लादेश में बनने वाला कपड़ा सस्ती दरों पर भारत में उपलब्ध होता है | RCEP India china Asian, RCEP India , RCEP china , RCEP narendra modiआरसीईपी के तहत दुनिया की कुल जीडीपी का 30 प्रतिशत हिस्सा आता है, लेकिन इसमें चीन का एकाधिकार है,भारत के शामिल होने पर नारियल, काली मिर्च, रबर, गेहूं और तिलहन के दाम गिर जाने का खतरा था। छोटे व्यापारियों का धंधा चौपट होने का खतरा था,इन 16 देशों के साथ होने वाले व्यापार में भारत 11 देशों के साथ व्यापार घाटे की स्थिति में है। भारत इन देशों से जितना सामान खरीदता है उससे कहीं कम उन्हें बेचता है,भारत और बांग्लादेश के बीच मुक्त व्यापार का समझौता है। इससे बांग्लादेश में बनने वाला कपड़ा सस्ती दरों पर भारत में उपलब्ध होता है | RCEP India china Asian, RCEP India , RCEP china , RCEP narendra modi

India will be more self-reliant than RCEP, will succeed in beating China | RCEP से हटकर भारत और ज्यादा आत्मनिर्भर बनेगा, चीन को पटखनी देने में होगा सफल - Dainik Bhaskar

भारत भले ही आरसीईपी समझौते का हिस्सा न हो, पर इन सभी देशों से उसके अच्छे व्यापारिक रिश्ते हैं। चूंकि यह समझौता विभिन्न देशों के लिए एक-दूसरे से कच्चा और अर्धनिर्मित माल खरीदना पहले से कहीं ज्यादा आसान बना देगा, लिहाजा इसका सीधा परिणाम यह होगा कि भारत अपनी तरफ से टैक्स में अतिरिक्त छूट न दे तो भी इनका माल भारत के बाजार में पहले से कम कीमत पर आने लगेगा। भारत भले ही आरसीईपी समझौते का हिस्सा न हो, पर इन सभी देशों से उसके अच्छे व्यापारिक रिश्ते हैं। चूंकि यह समझौता विभिन्न देशों के लिए एक-दूसरे से कच्चा और अर्धनिर्मित माल खरीदना पहले से कहीं ज्यादा आसान बना देगा, लिहाजा इसका सीधा परिणाम यह होगा कि भारत अपनी तरफ से टैक्स में अतिरिक्त छूट न दे तो भी इनका माल भारत के बाजार में पहले से कम कीमत पर आने लगेगा।

क्या अब चीन के नेतृत्व वाले आरसीईपी समझौते से क्षेत्र में चीन का असर और भी बढ़ेगा? भारत ने पिछले साल 'दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड डील' हाथ खींच लिया था.क्या अब चीन के नेतृत्व वाले आरसीईपी समझौते से क्षेत्र में चीन का असर और भी बढ़ेगा? भारत ने पिछले साल 'दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड डील' हाथ खींच लिया था.

आसियान (ASEAN) के दस देशों और चीन, जापान सहित कुल 15 ​देशों ने एक बड़ा क्षेत्रीय आ​र्थिक समझौता (RCEP) किया है, लेकिन भारत इस समझौते से बाहर रहा. पीएम मोदी ने पिछले साल ही देशहित में इस डील से बाहर रहने का निर्णय लिया था. आसियान (ASEAN) के दस देशों और चीन, जापान सहित कुल 15 ​देशों ने एक बड़ा क्षेत्रीय आ​र्थिक समझौता (RCEP) किया है, लेकिन भारत इस समझौते से बाहर रहा. पीएम मोदी ने पिछले साल ही देशहित में इस डील से बाहर रहने का निर्णय लिया था.

Explainer: चीन सहित 15 देशों ने किया दुनिया का सबसे बड़ा समझौता, जानें-भारत क्यों रहा इससे अलग  - Explainer RCEP agreement 15 countries China have signed know why India out of it tutd - AajTak

मौजूदा वक्‍त में आरसेप भारत के लिए बोझ बन जाता। अब आरसेप यानी रीजनल कांप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप पर समझौता हो चुका है और भारत के लिए विकल्प खुला रखा गया है। ऐसे में सवाल लाजमी है कि इससे पहले आरसेप को लेकर उत्साहित भारत के सामने कौन सी चिंताएं थीं...मौजूदा वक्‍त में आरसेप भारत के लिए बोझ बन जाता। अब आरसेप यानी रीजनल कांप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप पर समझौता हो चुका है और भारत के लिए विकल्प खुला रखा गया है। ऐसे में सवाल लाजमी है कि इससे पहले आरसेप को लेकर उत्साहित भारत के सामने कौन सी चिंताएं थीं...

RSEP becomes a burden for India in the current situation know its reasons

रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप यानी आरसीईपी पर 15 देशों ने रविवार को हस्ताक्षर कर what is rcep and Why India didnt join worlds largest free trade agreement, Business Hindi News - Hindustanरीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप यानी आरसीईपी पर 15 देशों ने रविवार को हस्ताक्षर कर दिया। दुनिया की जीडीपी का 30 प्रतिशत हिस्सा इन 15 देशों से ही आता है, इस लिहाज से यह दुनिया का सबसे बड़ा...

what is rcep and Why India didnt join worlds largest free trade agreement - RCEP क्या है और भारत इसमें क्यों शामिल नहीं हुआ?

RCEP समझौते पर रविवार को चीन समेत 15 देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं. RCEP का मकसद आसियान और एफटीए साझेदारों के साथ आधुनिक, व्यापक और उच्च-गुणवत्ता की आर्थिक साझेदारी बनाने पर है, लेकिन भारत ने पिछले साल ही इससे अपना नाम वापस ले लिया था.RCEP समझौते पर रविवार को चीन समेत 15 देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं. RCEP का मकसद आसियान और एफटीए साझेदारों के साथ आधुनिक, व्यापक और उच्च-गुणवत्ता की आर्थिक साझेदारी बनाने पर है, लेकिन भारत ने पिछले साल ही इससे अपना नाम वापस ले लिया था.

दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौते में क्यों शामिल नहीं हुआ भारत, क्या होगा इसका असर?

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अमेरिकी दबाव में आकर ही भारत व्यापार समझौता आरईसीपी यानी रीजनल कॉम्प्रेहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप में शामिल नहीं हुआ है। ऐसे समय जब चीन अपने उत्पाद पूरी दुनिया में बेचने के लिए हर मुमकिन उपाय कर रहा है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कड़ी टक्कर दे रहा है, एशिया प्रशांत के 15 देशों ने एक व्यापार समझौते पर दस्तख़त किए हैं।

15 countries sign trade deal RECP or regional comprehensive economic partnership - दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौते में आख़िर क्यों नहीं है भारत? - Satya Hindi

समझौते में भारत के लिए विकल्प खुले रखे गए हैं.अपना बाजार को खोलने की अनिवार्यता की वजह से भारत इस समझौते से बाहर निकल गया था. इस बीच जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा है कि उनकी सरकार इस समझौते में भविष्य में भारत की वापसी की संभावना समेत स्वतंत्र एवं निष्पक्ष आर्थिक क्षेत्र के विस्तार को समर्थन देती है. समझौते में भारत के लिए विकल्प खुले रखे गए हैं.अपना बाजार को खोलने की अनिवार्यता की वजह से भारत इस समझौते से बाहर निकल गया था. इस बीच जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा है कि उनकी सरकार इस समझौते में भविष्य में भारत की वापसी की संभावना समेत स्वतंत्र एवं निष्पक्ष आर्थिक क्षेत्र के विस्तार को समर्थन देती है. 

15 countries signed a sprawling Asian trade deal huge coup for China in extending its influence - चीन समेत 15 देशों ने सबसे बड़े व्यापार समझौते पर किए दस्तखत, दायरे में विश्व की 1/3 आर्थिक गतिविधियां  | World News in Hindi

IBC24 Newsआसियान, चीन समेत 15 देश करेंगे विश्व का सबसे बड़ा व्यापार समझौता 15 countries including ASEAN, China to hold world's largest trade agreement

15 countries including ASEAN, China to hold world's largest trade agreement | चीन समेत 15 देशों के बीच विश्व का सबसे बड़ा व्यापार समझौता, भारत नहीं है शामिल

हनोई (वियतनाम)। चीन और 14 अन्य देशों ने विश्व के सबसे बड़े व्यापारिक गुट के गठन पर सहमति जताई है, जिसके दायरे में करीब एक तिहाई आर्थिक गतिविधियां आएंगी। एशिया में कई देशों को उम्मीद है कि इस समझौते से कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी की मार से तेजी से उबरने में मदद मिलेगी।हनोई (वियतनाम)। चीन और 14 अन्य देशों ने विश्व के सबसे बड़े व्यापारिक गुट के गठन पर सहमति जताई है, जिसके दायरे में करीब एक तिहाई आर्थिक गतिविधियां आएंगी। एशिया में कई देशों को उम्मीद है कि इस समझौते से कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी की मार से तेजी से उबरने में मदद मिलेगी।

चीन समेत 15 देशों के बीच होगा विश्व का सबसे बड़ा व्यापार समझौता, जानिए भारत क्यों नहीं है शामिल... | Webdunia Hindi