1. अंतर-धार्मिक विवाह पर बड़ा फैसला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- शादी से 30 दिन पहले नोटिस देना प्राइवेसी का हनन...  दैनिक भास्कर
  2. इंटर कास्ट मैरिज पर इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, एक महीने का इंतजार खत्म, पढ़ें पूरी जानकारी  News18 इंडिया
  3. Special Marriages Act में अब फौरन होगी शादी, नोटिस बोर्ड पर नहीं लगेंगी तस्वीरें  NDTV India
  4. हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत 30 दिन का नोटिस अब अनिवार्य नहीं  Hindustan हिंदी
  5. अंतर-धार्मिक विवाहों पर कोर्ट का बड़ा फैसला, शादी से पहले नोटिस लगाना व आपत्ति मंगाना गलत  Patrika News
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अलग-अलग धर्मों के कपल की शादी के मामले में बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी से 30 दिन पहले जरूरी तौर पर नोटिस देने के नियम अनिवार्य नहीं है। इसको ऑप्शनल बनाना चाहिए। इस तरह का नोटिस प्राइवेसी यानी निजता का हनन है। यह कपल की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए कि वह नोटिस देना चाहते हैं या नहीं। | Allahabad High Court says 30-day notice under Special Marriage Act violates privacy, makes it optionalअलग-अलग धर्मों के कपल की शादी के मामले में बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी से 30 दिन पहले जरूरी तौर पर नोटिस देने के नियम अनिवार्य नहीं है। इसको ऑप्शनल बनाना चाहिए। इस तरह का नोटिस प्राइवेसी यानी निजता का हनन है। यह कपल की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए कि वह नोटिस देना चाहते हैं या नहीं। | Allahabad High Court says 30-day notice under Special Marriage Act violates privacy, makes it optional

Allahabad High Court said- 30 days notice under Special Marriage Act, violation of privacy, make it optional | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- शादी से 30 दिन पहले नोटिस देना प्राइवेसी का हनन, इसे ऑप्शनल बनाएं - Dainik Bhaskar

स्पेशल मैरिज को लेकर ये फैसला हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से जस्टिस विवेक चौधरी ने दिया है. साफ़िया सुलतान की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है.स्पेशल मैरिज को लेकर ये फैसला हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से जस्टिस विवेक चौधरी ने दिया है. साफ़िया सुलतान की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है.

इंटरकास्ट मैरिज पर इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, एक महीने का इंतजार खत्म, पढ़ें पूरी जानकारी

स्पेशल मैरिजेस एक्ट (Special Marriage Act) में अब फौरन शादी हो सकेगी. अब शादी के लिए एक महीने इंतज़ार नहीं करना होगा. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में एक महीने तक शादी करने वालों की फोटो नोटिस बोर्ड पर लगाने की पाबंदी खत्म कर दी है. अदालत ने ये आदेश एक हैबिस कार्प्स एक्ट (Habeas Corpus Act) के तहत सुनवाई करते हुए दिया. इस मामले में सफ़िया सुल्ताना नाम की एक मुस्लिम लड़की ने हिन्दू बनकर अपने दोस्त अभिषेक से शादी कर ली थी, लेकिन सफ़िया के पिता उसे उसके पति के साथ जाने से रोक रहे थे. स्पेशल मैरिजेस एक्ट (Special Marriage Act) में अब फौरन शादी हो सकेगी. अब शादी के लिए एक महीने इंतज़ार नहीं करना होगा. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में एक महीने तक शादी करने वालों की फोटो नोटिस बोर्ड पर लगाने की पाबंदी खत्म कर दी है. अदालत ने ये आदेश एक हैबिस कार्प्स एक्ट (Habeas Corpus Act) के तहत सुनवाई करते हुए दिया. इस मामले में सफ़िया सुल्ताना नाम की एक मुस्लिम लड़की ने हिन्दू बनकर अपने दोस्त अभिषेक से शादी कर ली थी, लेकिन सफ़िया के पिता उसे उसके पति के साथ जाने से रोक रहे थे. 

Now marriage will take place immediately under the Special Marriages Act, pictures will not be put on the notice board - Special Marriages Act में अब फौरन होगी शादी, नोटिस बोर्ड पर नहीं लगेंगी तस्वीरें | India News in Hindi

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शादियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर कोर्ट ने कहा है कि विवाह से पहले नोटिस मांगना गलत है. यही नहीं, कोर्ट ने कहा कि पसंद का जीवन साथी चुनना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है.शादियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर कोर्ट ने कहा है कि विवाह से पहले नोटिस मांगना गलत है. यही नहीं, कोर्ट ने कहा कि पसंद का जीवन साथी चुनना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है.

Allahabad High Court Given Important Directions On Marriage Registration Ann | शादियों के रजिस्ट्रेशन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया ये अहम फैसला, पढ़ें पूरा मामला

Allahabad News in Hindi: लव जिहाद कानून के बीच अंतर-धार्मिक विवाहों (Inter Religion marriage) के मामले में नोटिस जारी करने व आपत्तियां मंगाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High court) ने गलत ठहराया है।लव जिहाद कानून के बीच अंतर-धार्मिक विवाहों (Inter Religion marriage) के मामले में नोटिस जारी करने व आपत्तियां मंगाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High court) ने गलत ठहराया है।

Allahabad Highcourt Over Notice Before Inter Religion Marriages - अंतर-धार्मिक विवाहों पर कोर्ट का बड़ा फैसला, शादी से पहले नोटिस लगाना व आपत्ति मंगाना गलत | Patrika News

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने व्यवस्था दी है कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत प्रकाशित किया जाने वाला नोटिस अब Big decision of Allahabad High Court 30 days notice is no longer mandatory under Special Marriage Act, UP Hindi News - Hindustanहाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने व्यवस्था दी है कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत प्रकाशित किया जाने वाला नोटिस अब अनिवार्य नहीं होगा। नोटिस का प्रकाशन वैकल्पिक होगा और यह जोड़ों के इच्छा पर निर्भर...

Big decision of Allahabad High Court 30 days notice is no longer mandatory under Special Marriage Act - हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत 30 दिन का नोटिस अब अनिवार्य नहीं

अंतर-धार्मिक जोड़ों की शादी के लिए नोटिस का अनिवार्य प्रदर्शन अब से वैकल्पिक होगा. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक आदेश में कहा कि इस तरह की शादी के लिए नोटिस लगाना अनिवार्य नहीं होगा. कोर्ट के इस फैसले से अंतर-धार्मिक जोड़ों को राहत मिलेगी. अंतर-धार्मिक जोड़ों की शादी के लिए नोटिस का अनिवार्य प्रदर्शन अब से वैकल्पिक होगा. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक आदेश में कहा कि इस तरह की शादी के लिए नोटिस लगाना अनिवार्य नहीं होगा. कोर्ट के इस फैसले से अंतर-धार्मिक जोड़ों को राहत मिलेगी.

UP: अंतर धार्मिक विवाह के लिए नोटिस लगाना अब अनिवार्य नहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला - No Need To Display Notice For Inter Faith Marriages Lucknow bench of Allahabad High Court - AajTak

इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताज़ा फ़ैसले के बाद स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत शादी करने वाले जोड़ों को अब सार्वजनिक नोटिस की 'बाधा' से नहीं गुज़रना होगा.इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताज़ा फ़ैसले के बाद स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत शादी करने वाले जोड़ों को अब सार्वजनिक नोटिस की 'बाधा' से नहीं गुज़रना होगा.