1. मोदी सरकार को बड़ी सफलता, लोकसभा में पास हुआ सवर्ण आरक्षण बिल  Webdunia Hindi
  2. आर्थिक आधार पर आरक्षण : कौन सा दल है पक्ष में और कौन खड़ा है विपक्ष में? जानें- विस्तार से  NDTV India
  3. नया आरक्षण : उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ानी होंगी 10 लाख नई सीट- Amarujala  अमर उजाला
  4. अगर 15 फीसदी आबादी को 10% आरक्षण, तो 85 फीसदी आबादी को 90% आरक्षण मिलना चाहिए - तेजस्वी  Hindustan
  5. ये कौन से गरीब हैं, जिन्हें आरक्षण मिलेगा...?  NDTV India
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नई दिल्ली। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को मंगलवार को 3 के मुकाबले 323 मतों से लोकसभा की मंजूरी मिल गई। अब कल इसके राज्यसभा में जाने की संभावना है, जहां उच्च सदन की बैठक एक दिन और बढ़ा दी गई है। सवर्ण आरक्षण बिल देश की 95 प्रतिशत जनसंख्या को प्रभावित करेगा।

जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला संविधान का 124वां संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने यह विधेयक पेश किया. एक दिन पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी प्रदान की थी. आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण को सोमवार को मंजूरी दी थी.  सूत्रों के अनुसार, यह कोटा मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से अलग होगा. सामान्य वर्ग को अभी आरक्षण हासिल नहीं है.  समझा जाता है कि यह आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा, जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है. आरक्षण का लाभ उन्हें मिलने की उम्मीद है जिनकी वार्षिक आय आठ लाख रूपये से कम होगी और 5 एकड़ तक जमीन होगी. मोदी सरकार के इस फैसले का ज्यादातर विपक्षी दलों ने स्वागत किया है, हालांकि कुछ दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल भी खड़े किये हैं और इसे महज चुनावी स्टंट बताया है. आइये आपको बताते हैं कि आर्थिक आधार पर आरक्षण के मुद्दे पर विभिन्न राजनैतिक दलों की क्या राय है. 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को सवर्ण वर्ग की एक अहम मांग को मानते हुए आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को सरकारी नौकरियों व शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी थी।

बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने केंद्र में सत्तासीन If 15 percent of the population should gett 10 percent reservation then 85 percent of the population should get 90 percent reservation says tejaswhi yadav

आरक्षण को लेकर BJP और कांग्रेस जैसी मूलतः अगड़े वर्चस्व वाली पार्टियां हमेशा दुविधा में रहीं. लेफ्ट फ्रंट को भी जातिगत आधार पर आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन करने में वक्त लगा. संघ परिवार खुलेआम आरक्षण का विरोध करता रहा. 1990 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने पिछड़ी जातियों के आरक्षण के लिए मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने का ऐलान किया, तो देशभर में जो मंडल-विरोधी आंदोलन चल पड़ा, उसे इन राजनीतिक दलों की शह भी हासिल थी. मंडल की काट के लिए BJP ने कमंडल का दांव भी खेला.